पाठ 11 : जब सिनेमा ने बोलना सीखा

पाठ का सार (सरल भाषा में)

इस पाठ में सिनेमा के इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया गया है—
जब मूक फिल्मों का दौर समाप्त हुआ और बोलती फिल्मों की शुरुआत हुई।
शुरुआत में फिल्मों में आवाज़ नहीं होती थी;
कहानी हाव-भाव, संकेत और लिखे संवादों से समझाई जाती थी।

जब तकनीक विकसित हुई और
फिल्मों में संवाद और संगीत जुड़े,
तो सिनेमा और भी प्रभावशाली बन गया।
लोगों को कहानी समझने में आसानी हुई
और सिनेमा मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा का साधन भी बना।

लेखक बताता है कि
बोलती फिल्मों ने
अभिनय, संगीत और भाषा—तीनों को नया रूप दिया
और सिनेमा जन-जन से जुड़ गया।


📝 प्रश्न–उत्तर (Question–Answer)

प्रश्न 1. मूक फिल्में क्या होती थीं?

उत्तर:
जिन फिल्मों में आवाज़ और संवाद नहीं होते थे, उन्हें मूक फिल्में कहते थे।


प्रश्न 2. सिनेमा के बोलना सीखने का क्या अर्थ है?

उत्तर:
फिल्मों में आवाज़, संवाद और संगीत का जुड़ना।


प्रश्न 3. बोलती फिल्मों से क्या परिवर्तन आया?

उत्तर:
कहानी अधिक स्पष्ट हुई और दर्शकों की रुचि बढ़ी।


प्रश्न 4. सिनेमा क्यों लोकप्रिय माध्यम बना?

उत्तर:
क्योंकि वह मनोरंजन के साथ शिक्षा और जानकारी भी देता है।


प्रश्न 5. इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर:
तकनीकी विकास से कला और संचार के साधन अधिक प्रभावी बनते हैं।


✍️ शब्दार्थ

  • मूक – बिना आवाज़ का

  • संवाद – बातचीत

  • तकनीक – तकनीकी साधन

  • मनोरंजन – आनंद

  • प्रभावशाली – असर डालने वाला


परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

  • मूक से बोलती फिल्मों का परिवर्तन

  • तकनीक का प्रभाव

  • सिनेमा का सामाजिक महत्व

1 thought on “पाठ 11 : जब सिनेमा ने बोलना सीखा”

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